19 फ़रवरी 2012

इस कधर कभी न हो |

इस कधर कभी भी न हो
कहीं नया सवेरा हो
कहीं नयी कसक हो
नयी बयार हो

नयी मंजिल हो
ओर एक नया ख्याल हो
कहीं कोई कदम हो

जीवन की कोई डगर हो
किसी से कोई परेशानी न हो
हर तरफ एक नया बयार हो

हमें न कोई टोके न कोई रोके
कोई किसी की रपट न करें
इसी में एक नया बयार हो  ।
 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें