कसक दिल की जगी रहे
आस संजोये हुए मन के झमेलों
से दूर और चलते रहे जिन्दगी की
भागदौड बरसात में भी बिन मौसमों
के रूख और हम जियें जिसमें संजीदगी |
आस संजोये हुए मन के झमेलों
से दूर और चलते रहे जिन्दगी की
भागदौड बरसात में भी बिन मौसमों
के रूख और हम जियें जिसमें संजीदगी |
यही जीवन का सच है....
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