सन्देह के जोड़ में,
ताकते रह जाते
हर समय कहीं
ठिकानों के साथ में
कई घुमावदार पंक्तिओं में
मन सहम जाए
इन सन्देह के घेरों में
जहाँ सन्देह न हो |
ताकते रह जाते
हर समय कहीं
ठिकानों के साथ में
कई घुमावदार पंक्तिओं में
मन सहम जाए
इन सन्देह के घेरों में
जहाँ सन्देह न हो |
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