अक्सर हम नासमझ
बनकर बातों- बातों में
गलती कर बैठते हैं
समझ कर भी
नासमझी का नुक्सान
भुगतना पड़ता है
दोस्ती में भूल से
जाते हैं बातों का रस
जिसका खामियाजा
भुगतना सबसे कठिन है
उठते-बैठते जुड़ते हुए
बातों के मोल से घोल में
अक्सर पिछड़ जाते हैं ।
बनकर बातों- बातों में
गलती कर बैठते हैं
समझ कर भी
नासमझी का नुक्सान
भुगतना पड़ता है
दोस्ती में भूल से
जाते हैं बातों का रस
जिसका खामियाजा
भुगतना सबसे कठिन है
उठते-बैठते जुड़ते हुए
बातों के मोल से घोल में
अक्सर पिछड़ जाते हैं ।
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