लगाव
अनुभूतियों के विस्मृत-अविस्मृत पल जो कि अबाध गतिविधियों के साथ अग्रसर होता है |
12 अगस्त 2012
जब भी कोई दिनचर्या में हमें देखता है,
तनहाइयों में शान्त से रूह कांप उठते हैं|
पल-पल यादें अक्सर स्वभाव सताने लगती है,
गर कोई साथ दे तो मिठास उभर आता है|
कई बार यादें साथ होने का भ्रम पैदा करते हैं,
गर यादों में उल्लास व उत्साह हो अच्छा लगता है|
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