अनुभूतियों के विस्मृत-अविस्मृत पल जो कि अबाध गतिविधियों के साथ अग्रसर होता है |
25 अगस्त 2012
बिसरे पल
इन हरी भरी यादों में
कसक तराशता है,
फिर से माहौल बने
और हम उन में
संजीदगी से नये
तरीके से रूबरू हो सके,
सुदूर आगंतुक की तलाश में
बिसरे यादों के संग
ख़त्म न हो हरियाली
इन्तजार की घडी समाप्त हो |
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