हम गलतियों से
इतने पिछड़ जाते हैं
कि दोबारा उसी राह से
दूर जाने का मन करता है
बार - बार जिंदगी की भागदौड़
इतने पिछड़ जाते हैं
कि दोबारा उसी राह से
दूर जाने का मन करता है
बार - बार जिंदगी की भागदौड़
में कहीं न कहीं फिसल जाते हैं
कभी दूसरों की गलतियों के कारण
कभी स्वयं के बनाये हुए कलेवरों में
जब कभी भी जिन्दगी के भागडोर व
आपाधापी नुकसान भुगतना पड़ता है।
कभी दूसरों की गलतियों के कारण
कभी स्वयं के बनाये हुए कलेवरों में
जब कभी भी जिन्दगी के भागडोर व
आपाधापी नुकसान भुगतना पड़ता है।
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