6 जून 2012

घूम रहा हूँ

  हाइकु

घूम रहा हूँ
 आज भी शहर
 दर शहर

 आईने जहाँ
 दर्पण के रंग
 रूप लिये हो

 ख़ामोशी के साये
 उदासी  लिये
 फिर रहा हूँ

 घूम रहा हूँ
 मित्रों के चारों
 ओर बंदिश में

 घूम रहा हूँ
 बनते बिगड़ते
 रिश्तों की डोर ।

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