लगाव
अनुभूतियों के विस्मृत-अविस्मृत पल जो कि अबाध गतिविधियों के साथ अग्रसर होता है |
6 जून 2012
तन्हाई
न जाने मन क्यों
उदास हो जाता है
कभी हम मुस्कुराते
तो कभी तन्हाई पीछा
नहीं छोड़ता है ।
कभी उजियारा तो कहीं
अँधेरा हमें छोड़ जाता है
कहीं सन्नाटा कहीं भीड़
उभरता है ।
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