7 जून 2012

तलाश में यादें

                          
 जब कभी भी देखा है
 तलाश  में यादों 
 के संग यूँ ही
 जाते हैं अहसास 
 के साथ कहीं 
 रुकावटें तो कहीं 
 हवाएं चलती है
 सुदूर  क्षेत्रों में
 कहीं भोर होते
 अस्त  होते
 जब से देखा है 
 नम आँखों से
 ओझल  होते 
 कहीं  रोते
 कभी मुस्कुराते
 कहीं हँसते 
 कभी घूरते 
 कहीं उलझे
 कभी बदलते 
 कहीं बोझिल
 दिखाई देते हैं।


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