मुझे मालूम है
कि दरवाजे के भीतर
कभी मुस्कराते हुये
बातों में यूँ ही दिन
बीत जाते हैं
एक कसक मन के
भीतर हर समय उठता
बातों ही बातों में
मुस्कराने के पल
जहाँ कभी ये मुस्कराने
के ये पल दुबर न हो जाये।
कि दरवाजे के भीतर
कभी मुस्कराते हुये
बातों में यूँ ही दिन
बीत जाते हैं
एक कसक मन के
भीतर हर समय उठता
बातों ही बातों में
मुस्कराने के पल
जहाँ कभी ये मुस्कराने
के ये पल दुबर न हो जाये।
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