जहाँ से शुरू होते हैं
वहीँ पे रुक जाते हैं
चलने के लिए
किसी के आने जाने के
बहाने सोच में फस जाते हैं
परछाइयाँ भी रोक देते हैं
चलने के लिए ।
वहीँ पे रुक जाते हैं
चलने के लिए
किसी के आने जाने के
बहाने सोच में फस जाते हैं
परछाइयाँ भी रोक देते हैं
चलने के लिए ।
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