मुझ में, तुझ में
फासला इतना
न रहे कि सोच
न बनकर सोज
बना रहे,
इस बदलते दौर में
सोज एक शौक बने
कमोवेश किसी के
चाह में सहज सफ़र
चलता रहे ।
फासला इतना
न रहे कि सोच
न बनकर सोज
बना रहे,
इस बदलते दौर में
सोज एक शौक बने
कमोवेश किसी के
चाह में सहज सफ़र
चलता रहे ।
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