आँख चुराकर
जब कोई बात करता है
टपकते हैं बूँदें
जहाँ जलन अँधेरे की ओर
धकेलने की कोशिश में रहते हैं
स्वयं को बदलने के लिये
रुख बदलना पड़ता है
इन तूफानों से बार-बार
खेलकर जीना पड़ता है|
जहाँ जलन अँधेरे की ओर
धकेलने की कोशिश में रहते हैं
स्वयं को बदलने के लिये
रुख बदलना पड़ता है
इन तूफानों से बार-बार
खेलकर जीना पड़ता है|
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