हालात न जाने क्यूँ
मजबूर कर देता
विकट परिस्थितियों में
बढते हुये कदम को
पीछे हटाना पडता है
कोई ठिकाना न होता
हम हो जाते हैं हालात
से मजबूर इस कधर |
मजबूर कर देता
विकट परिस्थितियों में
बढते हुये कदम को
पीछे हटाना पडता है
कोई ठिकाना न होता
हम हो जाते हैं हालात
से मजबूर इस कधर |
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