मैं
जब भी सोचता हूँ
कि कितना अलग
सा लगता है
हकीकत से हटना
ओर सामना करना
कहीं नया रंग रूप
नजर नहीं आता है
बदला बदला धुंधलापन
बादल सा नजर आता है
जहाँ बदलना हकीकत
सा बन जाता है
मैं समझ नहीं पाता
कि वहाँ कौन खड़ा है
रूबरू होते हुये देखते
हैं सफर में जाने
पहचाने ।
जब भी सोचता हूँ
कि कितना अलग
सा लगता है
हकीकत से हटना
ओर सामना करना
कहीं नया रंग रूप
नजर नहीं आता है
बदला बदला धुंधलापन
बादल सा नजर आता है
जहाँ बदलना हकीकत
सा बन जाता है
मैं समझ नहीं पाता
कि वहाँ कौन खड़ा है
मझधार में
जहाँ हम
एक दूसरे से अपने कोरूबरू होते हुये देखते
हैं सफर में जाने
पहचाने ।
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