9 दिसंबर 2010

ख्वाब

ख्वाब आते हैं मन में खवाब गुथियों में समाँ जाते हैं ओर करते हैं हलचल धुंध सा फैला है आँखों के सामने बादलों के घेरे में बस इसी आस में कब सुलझेगी ये अजब पहेली

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