१.स्थिति
इंसान बयान नहीं करता
स्थिति वास्तविकता को
बंद रख खोखलेपन के
सहारे जीता उडाता
पंछी बन हर वक्त
२.स्थिति
फिर वही धुंध आगाज फिर
शरद ऋतु का निपटता हमेशा
फिर वही शरद ऋतु लगे
जैसे परीक्षा की घड़ी
जो कल था वैसी स्थिति
में आजकल आईने के
रूप में दिखता हर पल
मुकेश नेगी, १२-०४-२०११.
इंसान बयान नहीं करता
स्थिति वास्तविकता को
बंद रख खोखलेपन के
सहारे जीता उडाता
पंछी बन हर वक्त
२.स्थिति
फिर वही धुंध आगाज फिर
शरद ऋतु का निपटता हमेशा
फिर वही शरद ऋतु लगे
जैसे परीक्षा की घड़ी
जो कल था वैसी स्थिति
में आजकल आईने के
रूप में दिखता हर पल
मुकेश नेगी, १२-०४-२०११.
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