लगाव
अनुभूतियों के विस्मृत-अविस्मृत पल जो कि अबाध गतिविधियों के साथ अग्रसर होता है |
9 दिसंबर 2010
उड़ान
उड़ान
हर इन्सान
उडाता जा रहा है
पंछियों की तरह
आसमान को छूने
के फ़िराक में
कब आएगा हमारा
वो घडी
जिसमे हमें भी मौका
मिले आसमान
को छूने का म..."
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